रामविलास को दलितों ने दिखाया काला झंडा।।।

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पटना बिहार मिथिलांचल न्यूज़ :-मोकामा में केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान और बिहार के उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी को दलित समुदाय ने बड़ा झटका दिया है. दोनों नेताओं को भीम आर्मी के लोगों ने काले झंडे दिखाए. स्थिति यह थी कि रामविलास पासवान मनाते रहे और दलित समुदाय के लोग मुर्दाबाद के नारे लगाते रहे.
यह सब हुआ चौहरमल मेला में

दरअसल केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान और बिहार के डिप्टी CM सुशील मोदी मोकामा के टाल क्षेत्र में आयोजित चौहरमल मेला में गए हुए थे. उनके साथ कई अन्य मंत्री भी थे. इसी कार्यक्रम में दलित लोगों ने दोनों नेताओं को काले झंडे दिखाए और विरोधी नारे लगाए.

हाल में सुप्रीम कोर्ट ने SC-ST act (दलित एक्ट) पर फैसला दिया है. इसके तहत आरोपी की तुरंत गिरफ्तारी अब नहीं होगी. इसी के विरोध में दलित लोगों ने दोनों नेताओं को काले झंडे दिखाए. हालांकि रामविलास पासवान ने उन्हें मनाने की कोशिश की. काफी देर तक हो-हंगामा होने के बाद मामला शांत हुआ. तब जाकर पासवान ने अपना भाषण दिया. उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री से इसमें संशोधन विधेयक लाने का आग्रह किया गया है।

पासवान ने कहा कि दलित एक्ट पर सुप्रीम कोर्ट के आये फैसले से समाज के लोगों में नाराजगी है. हमने फैसले को लेकर तुरंत ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भेंट की. प्रधानमंत्री से इसमें संशोधन विधेयक लाने की हमने मांग की है. उन्होेंने यह भी कहा कि 1989 में बनी वीपी सिंह की सरकार की सरकार में पहली बार बाबा साहब आंबेडकर की तस्वीर संसद भवन लगाई गई. इसके पहले कांग्रेस राज में संसद भवन में कोई नाम नहीं लेता था.

पासवान का मतलब भी समझाए हैं

उन्होंने अपने भाषण पासवान का अर्थ भी लोगों को समझाया. उन्होंने कहा कि पासवान देश की रक्षा करनेवाला होता है. मैं 70 साल का हो गया हूं. उन्होंने जोर देकर कहा कि जब तक जिंदा हूं, कोई माई का लाल देश से आरक्षण को खत्म नहीं कर सकता है।

सुशील मोदी ने कहा गरीबो का एक मात्र हथियार हैं आरक्षण

सभा में एससी-एसटी के मामले पर उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने कहा कि गरीबों का मात्र एक हथियार आरक्षण है। जिसको खत्म नहीं किया जा सकता। कुछ लोग इसे राजनीतिक रंग दे कर गरीबों को भटकाने का काम कर रहे है। इससे पहले समारोह में भाग लेने के लिए पहुंचे केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान, उप मुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी, भवन निर्माण मंत्री महेश्वरी हजारी ने बाबा चौहरमल मंदिर में पूजा-अर्चना की। समारोह में देर शाम पूर्व मुख्यमंत्री जीतनराम मांझी भी पहुंचे।

क्या बदलाव किए है सुप्रीम कोर्ट ने।

एससी/एसटी (उत्पीड़न निरोधक) कानून : इस कानून के तहत इस वर्ग में आने वाली जाती के व्यक्तियों को कोई भी जाती सूचक सब्द नहीं बोल सकता है अगर बोलता है तो वो इस धारा के तहत दंड का भागीदार होगा , और अब तक इस धारा के तहत लाखों लोग जेल की हवा खा चुकें है , किसी भी कानून को जरूरत महसूस होने पर संशोधन कर के उसमे बदलाव किया जाता है क्यूंकि क्या पता इसका गलत फायदा उठाया जा रहा हो ,अब बात आती है की इस कानून में क्या बदलाव किया गया है -इस कानून में ये बदलाव किया गया है की अब ये धाराएँ तब लागु होंगी जब उस मामले की पूरी जांच हो जाएगी यानि की कोर्ट का कहना है की इन धाराओं में काफी लोग गलत रूप से फ़साये जाते है और ये किसी हद तक सही भी है शायद क्यूंकि ग्रामीण इलाकों में पैसे के लेंन देन को लेकर अक्सर इस धारा का गलत उपयोग किया जाता रहा है ,

आइये अब नज़र डालते है इससे जुडे कुछ राजनीतिक गतिविधियों पर – कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी की अगुवाई में विभिन्न दलों के विपक्षी नेताओं ने बुधवार को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद से मुलाकात कर एससी/एसटी (उत्पीड़न निरोधक) कानून को शिथिल करने पर अपनी चिंता जतायी और उनसे हस्तक्षेप करने की मांग की.

विपक्षी नेताओं ने कहा कि इस बारे में उच्चतम न्यायालय के ताजा फैसले से ‘दलितों में असुरक्षा की भावना’ पैदा हुई है. राहुल के साथ बसपा, राकांपा, माकपा, सपा, द्रमुक एवं अन्य दलों के नेताओं ने राष्ट्रपति से बुधवार की शाम मुलाकात कर उन्हें एक ज्ञापन सौंपा. राहुल ने इस मुलाकात के बाद विपक्षी नेताओं के प्रतिनिधिमंडल की उपस्थिति में संवाददाताओं से कहा, ‘हमने अजा-अजजा कानून को शिथिल करने के बारे में राष्ट्रपति से मुलाकात की. उत्पीड़न (दलितों पर) बढ़ रहे हैं तथा कानून को कमजोर किया जा रहा है. राष्ट्रपति काफी सकारात्मक और मददगार थे.’ यह पूछे जाने पर कि क्या राष्ट्रपति ने उन्हें कोई आश्वासन दिया, राहुल ने कहा, ‘वह पहले आकलन करेंगे और समुचित कार्रवाई करेंगे.’

बसपा नेता सतीश चंद्र मिश्रा ने कहा कि प्रतिनिधिमंडल ने राष्ट्रपति से कहा कि सरकार ने मामले का ढंग से प्रतिनिधित्व नहीं किया, इसी कारण यह स्थिति उत्पन्न हुई है. मिश्रा ने कहा, ‘हमने राष्ट्रपति से कहा कि मुद्दे का प्रभावी ढंग से प्रतिनिधित्व नहीं किया गया और मांग की सर्वोच्च न्यायालय में एक पुनर्विचार याचिका दायर की जानी चाहिए.’ राष्ट्रपति को सौंपे गये ज्ञापन में कहा गया, ‘फैसले के बाद बहुत ही असहजता है तथा दलित समुदाय एवं अन्य उत्पीड़त वर्गों के सदस्यों में असुरक्षा की भावना है. सरकार ने यदि फौरन कदम नहीं उठाये, तो हमें भय है कि यह कहीं कुछ ऐसा रूप न ले ले जो राष्ट्रीय आपदा से कम नहीं हो.’ माकपा नेता टी के रंगराजन ने कहा कि उनकी पार्टी का मानना है कि शीर्ष न्यायालय में पुनर्विचार याचिका दायर की जानी चाहिए. उन्होंने कहा, ‘हमारा मानना है कि वह (राष्ट्रपति) इस बारे में उपचारात्मक कदम उठायेंगे और न्याय किया जायेगा.

इससे पहले राहुल ने ट्विटर पर कहा था, ‘अजा-अजजा उत्पीड़न निरोध कानून में गिरफ्तारी के प्रावधानों को शिथिल करने की उच्चतम न्यायालय का फैसला भारत भर में दलितों एवं आदिवासियों के खिलाफ बढ़ते उत्पीड़न की पृष्ठभूमि में आया है.’ राष्ट्रपति को सौंपे गये ज्ञापन में केंद्र सरकार पर हमला बोला गया है. इसमें कहा गया कि उच्चतम न्यायाल का फैसला ऐसे समय में आया है, जबकि देश भर के दलित संकट भरी स्थिति का सामना कर रहे हैं. देश में जगह-जगह होनेवाले उत्पीड़नों के कारण कई परिवार तबाह हो चुके हैं. ज्ञापन में आरोप लगाया गया, ‘इससे वर्तमान सरकार के दोहरे चेहरे का पता चलता है. एक अदालत के भीतर तथा दूसरा बाहर, जनता एवं मीडिया के समक्ष.’ ज्ञापन में राष्ट्रपति से हस्तक्षेप की मांग की गयी है.

आशीष श्रीवास्तव…..